Odisha: कला ,संस्कृति और साहित्य का एक अनूठा संगम आपको उडी़सा में देखने को सब जगह मिल जाएगा। भारत का यह गौरवशाली राज्य अपने अन्दर प्रकृति के अनुपम दृश्यों, राजसी ,महलों , झीलों , और ऐतिहासकि स्थलों को अपने भीतर समाए हुए है। यहां का जगन्नाथ मंदिर और कोर्णाक का सूर्य मंदिर इस राज्य की पहचान है। पर्यटक यहां आकर समुद्र तट के किनारे सर्फिंग जैसे रोमांचक खेलों का भी मजा ले सकते हैं।
इस राज्य का सौम्य वातावरण पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करने में सक्षम है। अगर आप भी उडी़सा जाने का मन बना रहे है। तो आपको उडी़सा के रेलवे स्टेशन से नजदीक ही अनेको ऐसे दर्शनीय स्थान , मंदिर और सुन्दर समुद्र तट मिल जाएगे। जहां आप अपना अच्छा समय व्यतीत कर सकते हैं। तो आइए जानते है उडी़सा की सबसे सुन्दर जगहों के बारे में –
ओडिशा का जगन्नाथ मंदिर | Sri Jagannath Temple
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से पुरी की दूरी 64 किलोमीटर है।कहा जाता है, कि इस दिव्य मंदिर का निर्माण पुरी नामक स्थान पर सोमवंश राजा अक्षयद्युम्न ने करवाया था। जिसको 11 वीं सदी के आस-पास राजा अनंतवर्मन चोडगंगा द्वारा मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया था। यह पवित्र हिन्दू मंदिर चार धामों (पुरी , द्वारका , बद्रीनाथ , रामेश्वरम) में से एक है। यह मंदिर भगवान विष्णु के एक रूप जगन्नाथ जी को समर्पित है।
जगन्नाथ का पुरी मंदिर अपनी वार्षिकरथ यात्रा के लिए प्रसिद्ध है। जब जगन्नाथ जी की रथ यात्रा पूरे धूम-धाम से निकाली जाती हैं। तो इस पवित्र उत्सव को मनाने के लिए दुनिया के हर हिस्से से भक्तों का जन सैलाव उमड़ता है। इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ जी को प्रत्येक दिन 6 बार भोग लगाया जाता है। कहा जाता है, कि इस मंदिर की रसोई दुनिया की सबसे विशाल रसोईघर है। इस रसोई में पकने वाले सभी व्यंजन की निगरानी माता लक्ष्मी जी स्वयं करती है।
ओडिशा का कटक | Cuttack City Odisha
ओडिशा के शासकों की लम्बे समय तक राजधानी रहे। इस शहर की स्थापना केशरी राजवंश के सम्राट केशरी ने सन 989 ई. में महानदी और काठजोडी़ के संगम स्थल पर की थी। इस शहर में भ्रमण योग्य कई ऐतिहासिक स्थल मौजूद है। यहां पर बलियात्रा एक मुख्य त्यौहार हैं। जिसे एक उत्सव की तरह मनाया जाता है। यह उत्सव लाखों हजारों लोगों द्वारा 8 दिनों तक लगातार मनाया जाता है।
कटक में घूमनें के लिए कई बेहतरीन स्थान मौजूद हैं। चुडंगगड़ दूर्ग, मधुसूदन संग्रहालय, स्वराज आश्रम, कनिका राजवाटी, सलीपुर ब्रांच संग्रहालय , लालबाग महल ,नौवाणिज्य संग्रहालय , बारबाटी किला, आनन्द भवन संग्रहालय, परमहंसनाथ मंदिर ,धवलेश्वर मंदिर ,और 11वीं शताब्दी में राजा मराकत केशरी ने नदी पर बाढ़ से बचने के लिए पत्थर की दीवार बनवाई थी। जो इस शहर के मुख्य आकर्षणों में से एक हैं।
ओडिशा का कोणार्क मंदिर | Konark Sun Temple Odisha
भारत के राज्य ओडिशा को कोर्णाक के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर के लिए भी जाना जाता है। कहा जाता हैं, कि इस मंदिर का निर्माण 13 वीं शताब्दी में पूर्वी गंगवंश के राजा प्रथम नरसिंह देव ने करवाया था। 1984 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया था।
इस मंदिर की स्थापत्य कला अद्भुत हैं। यहां इस मंदिर को सुन्दर आकृतियों और मूर्तियों द्वारा सुसज्जित किया है। जब सूर्य की किरण इस मंदिर पर पड़ती है। तो इसे देखकर एक दिव्य दृश्य की अनभूति होती है। ऐसा लगता है, जैसे सूर्य देव मानो स्वयं इस मंदिर में आते है। यह मंदिर लाखों पर्यटकों की पसंदीदा जगहों में से एक है। भुवनेश्वर से कोर्णाक के सूर्य मंदिर की दूरी 65km है।
ओडिशा कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग: ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर का निकटतम हवाई अड्डा अन्य दूसरे बड़े मुख्य शहरों से जुडा़ हुआ है। आप भारत के अन्य क्षेत्रों से यहा की यात्रा कर सकते हैं।
रेल मार्ग से: भुवनेश्वर के नजदीकी रेलवे स्टेशन से आप रेल परिवहन द्वारा यहां की खूबसूरती का आनंद लिया जा सकता है। यह रेलवे स्टेशन भारत के अन्य स्थानों से अच्छी तरह जुडा़ हुआ है।
निष्कर्ष | Odisha
इस आर्टिकल में हमनें ओडिशा (Odisha) के बारे में विस्तृत तरह से बताया हैं, जो यात्रा को सरल और सुगम बनाने में आपकी बहुत मदद करेगा। हमें आशा है कि आज का यह लेख आपको पसंद आया होगा।
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