Amba Mata Temple: अंबा माता मंदिर गुजरात ( Gujarat) के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। यह भगवान नारायण की पत्नी देवी लक्ष्मी (Goddess Lakshmi) को समर्पित मंदिर है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां मां का आशीर्वाद लेने आते हैं। अंबा माता और भगवान नारायण (Lord Narayan) की राजसी मूर्तियों को मंदिर के अंदर रखा गया है, जो उपासकों के लिए एक शांत वातावरण प्रदान करती हैं। जोड़े अपने जीवन में समृद्धि की कामना के लिए इस स्थान पर जाते हैं, और यह माना जाता है कि इस मंदिर में पूजा करने के बाद उनकी मनोकामना पूरी होती है।
अंबा माता मंदिर (Amba Mata Temple) गुजरात के जूनागढ़ (Junagadh) जिले में स्थित एक प्राचीन मंदिर है, और यह पूरे भारत में पाए जाने वाले 51 शक्तिपीठों (51 Shakti Peeths) में से एक है। यह धार्मिक मंदिर देवी पार्वती (Goddess Parvati) या देवी अम्बा (Goddess Amba) को समर्पित है, जिन्हें शक्ति (Shakti) का एक रूप माना जाता है।
माता अम्बा की पूजा करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए देश भर से तीर्थयात्री इस मंदिर में आते हैं। दूर-दूर से लोग यहां फूल, नारियल (coconuts) और पूजा का अन्य सामान चढ़ाकर मां को नमन करने आते हैं। अंबाजी मंदिर (ambaji temple) हिंदुओं के लिए बहुत धार्मिक महत्व रखता है क्योंकि यह माना जाता है कि देवी अम्बाजी अपने भक्तों को बुरी शक्तियों (evil forces) से बचाती हैं और उन्हें सौभाग्य प्रदान करती हैं।
Amba Mata Temple Location
मंदिर (Temple) गुजरात में स्थित है और यह नवरात्रि उत्सव (navratri festival) के दौरान लाखों भक्तों को आकर्षित करता है। भाद्रवी पूर्णिमा (Bhadarvi Purnima) इस सबसे पवित्र मंदिर में मनाया जाने वाला मुख्य त्योहार है। इस दौरान, राजस्थान (Rajasthan) से बड़ी संख्या में तीर्थयात्री (pilgrims) माँ अम्बा की पूजा करने के लिए अंबाजी आते हैं। अंबाजी के पास स्थित कुंभारिया जैन मंदिर (Kumbharia Jain temple) भी इस दौरान बड़ी संख्या में भक्तों को आकर्षित करता है।
Festival Celebrated at Temple
भाद्रपदी पूर्णिमा पर, कई भक्त उत्सव ( celebrations) में भाग लेते हैं और देवी अंबा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। यह एक शानदार घटना है जो पूरे भारत के लोगों को उनकी दिव्यता का जश्न मनाने और उनके जीवन में सौभाग्य और समृद्धि के लिए आशीर्वाद लेने के लिए एक साथ लाती है। इसलिए, अम्बाजी मंदिर नवरात्रि (Navratri) के दौरान सबसे अधिक देखे जाने वाले मंदिरों में से एक बना हुआ है क्योंकि हर साल भाद्रपदी पूर्णिमा पर तीर्थयात्रियों का भारी तांता लगा रहता है – जो इसे गुजरात के सबसे पसंदीदा तीर्थ स्थलों में से एक बनाता है!
मंदिर वैदिक काल (Vedic times) में दांता (Danta) के मूल मंदिर के आसपास बनाया गया था, जो भगवान शिव (Lord Shiva) और देवी शक्ति (Devi Shakti) को समर्पित था। ऐसा माना जाता है कि अरासुर नी अंबे (Arasur Ni Ambe) (देवी अंबाजी) के पिता (father) राजा दांता (King Danta) ने पूर्व-वैदिक काल में इस मंदिर का निर्माण किया था।
निष्कर्ष
अंबाजी मंदिर, अंबा माता या मां शक्ति को समर्पित पूजा का एक लोकप्रिय स्थान है – भगवान शिव की पत्नी, देवी पार्वती (Goddess Parvati) का एक अवतार। मां शक्ति से आशीर्वाद लेने के लिए पूरे भारत से भक्त नवरात्रि के दौरान अम्बाजी मंदिर जाते हैं। त्योहार का समापन भक्तों द्वारा देवी अंबा माता को सम्मान देने और उनके चरणों में विशेष पूजा अनुष्ठान करने के साथ होता है। नवरात्रि के दौरान मंदिर के आसपास का माहौल वास्तव में जादुई होता है और तीर्थयात्री जो तीर्थ यात्रा करते हैं वे धन्य महसूस करते हैं!
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